नमामि गंगे के ३००० करोड़ बंद बक्से में, नहीं हो पायी गंगा की सफ़ाई : CAG

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पिछले तीन वित्तीय वर्ष में सरकार गंगा सफ़ाई के लिए आवंटित ३२०० करोड़ का प्रयोग करने में नाकाम रही।जबकि केंद्रीय सरकार ने ख़ुद ही सुप्रीम कोर्ट में २०१८ तक गंगा की सफ़ाई करने का वायदा किया था।

A man cleans garbage along the banks of the river Ganges in Kolkata, India, April 9, 2017. REUTERS/Danish Siddiqui

हाल ही में CAG ने अपनी एक रिपोर्ट में ख़ुलासा किया कि किस तरह नमामि गंगे परियोजना के नाम पर आवंटित क़रीब ३००० करोड़ रुपए, जो की बिहार, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में गंगा सफ़ाई के लिए इस्तेमाल होना था, राज्यों की लापरवाही की वजह से इस्तेमाल ही नहीं हो पायी है।

रिपोर्ट्स के अनुसार नमामि गंगे परियोजना के लिए आवंटित  ₹ २१३३.७६ करोड़, ₹ ४२२.१३ करोड़ तथा ₹ ५९.२८ करोड़ बंद बक्से में बंद हैं क्यूँकि परियोजना से सम्बंधित राज्य परियोजना से जुड़े कार्य जैसे की Sewerage treatment Plants (STP) का निर्माण करना, Riverfronts का पुनःनिर्माण, वृक्षरोपन, effluents management, अपशिष्ट प्रबंधन (Waste Management) इत्यादि ३१ मार्च २०१७ तक लागू करने में असफल रही।

रिपोर्ट्स के अनुसार, छः शहरों मे जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनाव क्षेत्र वाराणसी, कानपुर, पटना, मुंगेर, इलाहाबाद और गएसपुर में गंगा में घुलित ऑक्सिजन की मात्रा २०१२-१३ की अपेक्षा कम हुई है।

ऋषिकेश से देवप्रयाग के बीच क़रीब १० घाट हैं जिसमें से केवल चार घाटों पर ही कार्य शुरू हो पाए हैं इसी तरह देवप्रयाग से रूद्र प्रयाग के बीच क़रीब १८ घाट हैं जिसमें से केवल ९ घाटों पर ही कार्य की शुरुआत हो पायी है। 

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